जब वो हाथ पकड़कर मेरी रोशनी बन गए- मैक्स फाउंडेशन की इंडिया    और साउथ एशिया की रीजन हैड विजी वेंकटेश की करीब 10 साल पहले 57 उम्र में ग्लोकोमा नाम की बीमारी हो गई. एक आँख से दिखाई देना बंद हो गया था. मायूस हुई लेकिन इन्होने महसूस किया कि इस बीमारी के कारण में अपने पेशेंट्स के दर्द को बेहतर तरीके से समझने लगी, क्योकिं वे कैंसर जैसी भयंकर बीमारी के बावजूद अपना अपना विश्वास नही खोते थे. उस दौरान इनके पति इनका साथ थाम कर इनका सहारा बने. आज भी जब ये शहर से बाहर पेशेंट्स की मदद के लिए जाती है तो वो इनके साथ जाते है. 1974 में इनकी अरेंज मैरिज हुई थी. इनके पेशेंट्स भी उन्हें वोलंटियर नम्बर वन कहते है


दो माह के बच्चे को लेकर स्कूल जाती थी- खातून बेगम की शादी के बाद पति के साथ इनकी सास ने घर से बाहर निकल दिया. पति ने कर्ज लेकर बिजनेस शुरू किया पर वो भी नही चला और कर्ज भी चढ़ गया. कर्ज चुकाने के लिए इन्होने एनजीओ की मदद से स्कूल ड्रॉप आउट बच्चों को पढाना शुरू किया. पति ठेला लगाने लगे. ये रोजाना दो महीने के बच्चे को गोद में लेकर स्कूल पढ़ाने जाती थी. कर्ज चुकाने में इन्हें छ: साल लगे. हाल ही में इनके पति ने नई स्कूटी और स्मार्ट फ़ोन खरीद कर दिया है. तमाम मुश्किल सहने के बावजूद इनके रिश्ते में वही रूमानियत है. अक्सर इनके पति गुल मुहम्मद कहते भी है की तुम मेरी मजबूत बाजू हो.


पति मजदुर, पर मुझे ग्रेजुएशन करवाया- गंगानगर जिले की संजू वर्मा की 2012 में 17 साल की उम्र में शादी हो गई थी और 2 साल जे अन्दर ही पति का रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई. तब बेटा 14 महीने का ही था. उस हादसे से संजू काफी समय तक बाहर नही निकल सकी. चूँकि संजू के पिता उन्हें वापस अपने घर ले आए थे. संजू के पिता ने आगे पढने के लिए प्रोत्साहित भी किया. 2016 में संजू की दूसरी शादी करवा डी गई. अब संजू अपनी दूसरी शादी शुदा जिंदगी खूब खुश है अब इन्हें लगता ही नही कि जिंदगी में इनके साथ बहुत बुरा हो चूका ह. पति की जिद के कारण संजू ने ग्रेजुएशन और टैली कंप्यूटर कोर्स किया. जबकि पति खुद मजदूरी करते है. पति शांतिस्वरूप गर्व से कहते है, आज पत्नी से मेरी पहचान बन चुकी है