शिवपुरी| यह खबर बीते कुछ दिन पहले 16 अक्टूबर की है, बालचंद्र लोधी (50) के पेट में तकलीफ होने के कारण उन्हें रविवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. बालचंद्र के बच्चे छोटे-छोटे होने के कारण सोमवार की शाम 7 बजे उनकी पत्नी घर चली गई.



मंगलवार को सुबह दस बजे उनको किसी ने फ़ोन कर बताया की उके पति अब नही रहे. जब मृतक की पत्नी अस्पताल पंहुची तो बेड पर उनकी देह पड़ी थी और बालचंद्र की आँखों और चेहरे पर चीटियाँ लगी हुई थी. ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और नर्स में इतनी भी मानवीयता नही थी की वे शव को ढंक दें.

कहा जाता है जीवित इन्सान से ज्यादा किसी मृत शव को सम्मान के साथ विदा किया जाता है और यहाँ डॉक्टर और नर्स में इतनी भी इंसानियत नही रही की वह उस शव को ढंक दे, लगता है इंसानियत ख़त्म होती नजर आ रही है